कैसी दी है ? रब तूने हो आज दुआई..✍
कैसी दी है ? रब तूने हो आज दुआई, कर दी तुझे पीर-पराई चौखट से हो मेरे !! हथेली पर मेरी लाडो-प्यारी लड़ी बढ़ी ! फूलों की पंखुड़ी हो मेरी.... बंध गयी हो - बन्धन में बंध गयी हो सात फेलो की माला में, कैसा यह पल आज बनके बौनी घड़ी में हो समाया रश्म यह रिवाज बाबुल का निभाने.. देखो सिरहाने लगके जा रही दुराली हो मेरी !! कैसी दी है ? रब तूने हो आज दुआई, कर दी तुझे पीर-पराई चौखट से हो मेरे !! आंगन में खेलती कल की झमकुड़ी मेरी, आज सजी-धवेळी बनके खड़ी दुल्हन ! दो चोटली बांध के आंगन में करती धमा-चौकड़ी " पा-पा " कहती - आज वो हमराही बनने हो चली, देखो मेरी नाजो की कच्ची कली आज बनके सेतु हाथ पति का थाम के जिम्मा दुनियादारी का निभाने हो चली !! कैसी दी है ? रब तूने हो आज दुआई, कर दी पीर-पराई चौखट से हो मेरे !! वन्स की चाह में भी-धिक लाड़ लड़ाए अनुज पर ! जब भी चोट लगी मुझे आंखों में आँसू तनुजा के हो आए, अंजानियो से डरती कली मेरी आज वो संस्कारो से लिपटी अजनबी का हाथ थामने हो चली.. माँ की लाडो - पापा की दुराली आँखों में लिए आंसू भावी सपनो को सजाने को ह...