" कह दे, " तू मुझे अलविदा "

कोई जुड़ रहा है, मुझसे
मै टूट रहा हु, खुद से
कैसे करू उनसे, मै बया
समझ नही आता, कोई समझाता नही
वो लम्हे-लम्हे करीब आ रहे है
मै लम्हा-लम्हा दूर जा रहा हु
प्यार तो उनसे बेपनाह करता हु
पर तन्हा हु, खुद से...
उनकी ख़ुशी के खातिर सलगा रहा हु, खुद को
कोसो दूर जाना चाहता हु
पर, वो मुझसे प्रित की आस रगाये बैठे है
हा मानता हु, काफी लम्हे गुजर जाहेगे,
एक पल को हर-पल साथ पाने मे
पर, प्यार को प्यार मिले यह जरूरी तो नही
वो जहा रहे खुश रहे, यह प्यार है
कैसे बया करू, उनसे...
अपने लफ्जो मे की छोड़ दे संग-साथ, तू मेरा
ना कोई मेरी हाइट-फाइट है
ना कोई मेरा रंग-रूप है
ना कोई मेरी पर्सनालिटी है
ना कोई मेरा स्टेटस है
बस, मै एक रमता जोगी हु.
जो रहता था, अपनी मस्ती मे
अरे मिल जाहेगा, उन्हें हमसे बेहतर
अरे कोई तो उन्हें बताहो
जिसकी उसकी अपनी लाइफ होगी
वो उनकी वाइफ होगी
जिसकी अपनी हाइट-फाइट होगी
वो उनकी साइट होगी
जिसकी उसकी अपनी पर्सनालिटी होगी
वो उस पर्सन की-अंस होगी
उनकी ख़ुशी के खातिर...
अपने अंदर बैठे इन्सान को मार रहा हु
वो मेरे संग खुश रहेंगे-यह सम्भव है
तभी जब मेरे अंदर बैठा इन्सान, शान से जीहेगा
यह सम्भव है, तभी जब सबसे कर लुगा किनारा
और, अपनी शान से अपनी पहचान बनाहुगा
यह सम्भव तो है...
पर, उनका साथ पाने मे देर हो जाहेगी
काश उन्हें समझ आ जाहे
मेरे लफ्ज की..कह दे,
वो मुझे अपने लफ्जो में, अलविदा
#M@n6i

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